चौखट

वो बैठी चौखट पर सोचे जा रही थी

नम आँखें वो मौसम पुराने देखे जा रही थी।

वो यादे मानो कसी हुई कोई गांठ 

जिसे बरसो पहले लगाकर भूला बिसरा हो मन।।

चंद दिनो की दूरी का वादा

हो गया था यौवन से झूरियो मे तबदील।

हर बीतता हुआ समय लिये हर बार नयी आशा o

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